ओबीसी 27% आरक्षण पर आज होगी सुनवाई, PSC के 13% पदों के अनहोल्ड मामले में अहम फैसला संभव

भोपाल 
मध्य प्रदेश में
13% ओबीसी आरक्षण पर रोक को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। इस पर(4 अगस्त) सुनवाई हुई। कोर्ट रूम नंबर 06 में यह सुनवाई (सीरियल नंबर 59) हुई। ओबीसी महासभा की ओर से अधिवक्ता वरुण ठाकुर, धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा और एड. रामकरण ने पक्ष रखा था ।मध्यप्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 मई 2022 के अंतरिम आदेश में ओबीसी आरक्षण की सीमा 14% तक सीमित कर दी थी। इसके बाद से यह मामला कोर्ट में चल रहा है। इस मामले में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चांडुरकर की खंडपीठ ने 5 अगस्त को साढ़े चार मिनट चली सुनवाई के बाद इसकी अगली सुनवाई 12 अगस्त तय की थी।

पांच अगस्त को हुई सुनवाई में ओबीसी महासभा की ओर से अधिवक्ता वरुण ठाकुर, धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा और एड. रामकरण की ओर से कहा गया कि परीक्षा हो चुकी है, भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन नियुक्ति नहीं दी जा रही है। छत्तीसगढ़ जैसी राहत एमपी में दी जाए। इस पर अनारक्षित वर्ग द्वारा 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिए जाने पर बात रखी गई। तब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अगले मंगलवार यानी 12 अगस्त को सबसे पहले सुनवाई के लिए रखने का आदेश दिया।

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22 जुलाई को सरकार ने मांगी थी राहत

इस मामले में 22 जुलाई को हुई सुनवाई में मप्र सरकार ने राहत की मांग की थी। सरकार की ओर से कहा गया था कि जैसे छत्तीसगढ़ में 58% आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने मान्यता दी है, वैसे ही मप्र को भी राहत दी जाए, ताकि भर्ती प्रक्रिया पूरी हो सके।

ओबीसी पक्षकार ने भी एक्ट को लागू करने की मांग की, जबकि अनारक्षित पक्ष ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मप्र और छत्तीसगढ़ के मामलों में अंतर है, क्योंकि मप्र में ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% किया गया, जबकि छत्तीसगढ़ में एसटी आबादी अधिक होने के कारण वहां का आरक्षण पहले जैसा है।

जुलाई में ही यह मामला भी आया

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इसके पहले जुलाई में हुई एक अन्य सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के चयनित अभ्यर्थियों की ओर से मांग की गई थी कि राज्य में ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण देने का कानून होने के बावजूद 13% पदों को होल्ड पर रखा गया है, जिसे हटाया जाए। इस पर सरकार के वकीलों ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार भी चाहती है कि ओबीसी को 27% आरक्षण मिले। हम इसको अनहोल्ड करने के समर्थन में हैं। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने आपको रोका कब है?

एक नोटिफिकेशन राज्य सरकार ने 22 सितंबर 2022 को जारी किया था। उसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये नोटिफिकेशन कानून के खिलाफ क्यों जारी किया गया था? इस सुनवाई को लेकर वरुण ठाकुर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने माना कि ये नोटिफिकेशन गलत तरीके से जारी हुआ है। हम इसको अनहोल्ड करने के समर्थन में हैं।

सरकार के आदेश पर स्टे हटाने की मांग

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक प्रदेश में 2019 में ओबीसी को 27% आरक्षण देने का बिल पारित हुआ था। उसके बाद जब 27% ओबीसी आरक्षण के क्रियान्वयन आदेश जारी हुए तो 4 मई 2022 में शिवम गौतम नाम के एक अभ्यर्थी ने मप्र हाईकोर्ट में याचिका लगाई।

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हाईकोर्ट ने ओबीसी को 27% आरक्षण के क्रियान्वयन आदेश पर स्टे दे दिया। इसके साथ ही राज्य सरकार के संशोधित कानून और नियम पर रोक लगा दी गई थी। इन संशोधनों से आरक्षण की कुल सीमा 73% तक पहुंच रही थी। एसटी को 20%, एससी को 16%, ओबीसी को 27% और आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य (ईडब्ल्यूएस) को 10% आरक्षण शामिल था।

बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर हो गया। सरकार ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए ट्रांसफर केस 7/2025 के तहत स्टे वैकेंट की सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है। अब अगर सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाता है तो मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27% हो सकता है। अभी तक 70 से ज्यादा याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर हो चुकी हैं।

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